Ayurveda Treatment (Healing with Ayurveda)

आयुर्वेदिक चिकित्सा (Ayurveda Treatment) दुनिया की सबसे पुरानी प्राकृतिक उपचार प्रणालियों (Natural Healing Systems) में से एक है। इस आयुर्वेदिक चिकित्सा (Healing with Ayurveda) को भारत में 3,000 साल पहले विकसित किया गया था। आयुर्वेद (Ayurveda) शब्द की उत्पत्ति संस्कृत के आयु (जीवन) और वेद (विज्ञान या ज्ञान) से हुआ है।

आयुर्वेद का संबन्ध जीवन के ज्ञान से है। यह शरीर, मन, आत्मा और पर्यावरण के बीच संतुलन स्थापित कर प्राकृतिक उपचारो (Natural Remedies) द्वारा रोग का निदान करता है। आयुर्वेद व्यक्ति के चेतना में उत्पन्न असंतुलन या तनाव को संतुलित करता है।

Ayurvedic Healing in Hindi

आयुर्वेद उपचार (Ayurveda Treatment) का आयाम आंतरिक शुद्धिकरण प्रक्रिया (Internal Purification Procedures), विशेष आहार (special diets), हर्बल उपचार (herbal remedies), मालिश चिकित्सा (massage therapy), योग (Yoga)और ध्यान् (meditation) तक होता है। यह स्वास्थ्य और कल्याण मन, शरीर और आत्मा के बीच संतुलन पर निर्भर करता है। आयुर्वेदिक चिकित्सा (Healing with Ayurveda medicine) का मुख्य लक्ष्य अच्छे स्वास्थ्य को बढ़ावा देना होता है, ना कि बीमारी (disease) से लड़ना।

Ayurveda Treatment का प्राथमिक आधार शरीर का संविधान (प्रकृति), जीवन शक्ति (दोष) और सार्वभौमिक अंतर्संबंध की अवधारणाएं हैं।

आयुर्वेद उपचार (Ayurvedic Healing) का लक्ष्य व्यक्ति को अशुद्धियों से दूर करना, लक्षणों को कम करना, प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाना (increase immunity), चिंता को कम करना (reduce anxiety) तथा जीवन में सामंजस्य बढ़ाने में सहायता करना है। आयुर्वेदिक चिकित्सा (Ayurvedic Healing) में तेल (Oils), मसालों (spices), जड़ी-बूटियों (herbs) और अन्य पौधों का बड़े पैमाने पर उपयोग किया जाता है।

संयुक्त राज्य अमेरिका में, आयुर्वेद उपचार (Ayurveda treatment) को पूरक और वैकल्पिक चिकित्सा (सीएएम) का एक रूप माना जाता है। भारत में, आयुर्वेदिक चिकित्सा (Healing with Ayurveda) का महत्व उतना ही है जीतना कि पारंपरिक पश्चिमी चिकित्सा (Traditional Western Treatment), पारंपरिक चीनी चिकित्सा (Traditional Chinese treatment), प्राकृतिक चिकित्सा (Naturopathy Treatment) और होम्योपैथिक चिकित्सा (Homeopathic Medicine treatment) का।

भारत में आयुर्वेद चिकित्सा Ayurvedic Healing in India

भारत में आयुर्वेद के चिकित्सक (Ayurveda practitioners) राज्य द्वारा मान्यता प्राप्त होते है। हालांकि अभी तक आयुर्वेदिक चिकित्सकों (Ayurveda Doctors) को संयुक्त राज्य अमेरिका में लाइसेंस प्राप्त नहीं है और नहीं आयुर्वेदिक प्रशिक्षण (Ayurveda training) या प्रमाणन के लिए कोई राष्ट्रीय मानक है। कुछ राज्यों में शैक्षणिक संस्थानों के रूप आयुर्वेदिक स्कूलों (Ayurveda schools) को स्वीकृति प्राप्त है।

भारतीय या पश्चिमी शोधों में अभी भी बहुत सी आयुर्वेदिक सामग्रियों (Ayurveda ingredients) का गहन अध्ययन नहीं हो सका है। आयुर्वेदिक चिकित्सा (Ayurveda treatment) में जड़ी-बूटियाँ (herbs), धातुएँ, खनिज या अन्य सामग्रियाँ का उपयोग होती हैं जो अनुचित तरीके से या बिना प्रशिक्षित चिकित्सक के निर्देशन के हानिकारक हो सकती हैं। संयुक्त राज्य अमेरिका में आयुर्वेदिक दवाओं (dietary supplement) को दवाओं के बजाय आहार पूरक के रूप में विनियमित किया जाता है।

आयुर्वेदिक चिकित्सा (Ayurveda Treatment in Hindi)

CAM therapy अध्ययन कर रहे छात्रों का यह मानना है कि इस ब्रह्माण्ड में सब कुछ जुड़ा हुआ है चाहें मृत हो या जीवित। यदि आपका मन, शरीर और आत्मा ब्रह्मांड के संतुलन में हैं, तो आपका स्वास्थ्य अच्छा है।

जब किसी कारण वश संतुलन बिगड़ जाता है तो आप बीमार हो जाते है। संतुलन बिगड़ने के मुख्य कारणों में आनुवंशिक या जन्म दोष, चोट, जलवायु और मौसमी परिवर्तन, उम्र और आपकी भावनाएं शामिल हो सकती हैं।

आयुर्वेद का अभ्यास करने वाले छात्रों का मानना ​​है कि प्रत्येक व्यक्ति ब्रह्मांड में पाए जाने वाले पांच मूल तत्वों से बना है: अग्नि, वायु, आकाश, पृथ्वी और जल।

यह पंच तत्व मानव शरीर में मिलकर तीन जीवन शक्तियाँ या ऊर्जाएँ बनाते हैं, जिन्हें त्रिदोष (Tridoshas) कहा जाता है। त्रिदोष ही यह नियंत्रित करते हैं कि आपका शरीर कैसे काम करता है। यह त्रिदोष वात दोष,पित्त दोष और कफ दोष है। वात दोष (अंतरिक्ष और वायु) हैं , पित्त दोष (अग्नि और जल) है और कफ दोष (जल और पृथ्वी) है।

हमे त्रिदोष का एक अनूठा मिश्रण विरासत में मिला हुआ है। आमतौर पर एक दोष दूसरे दोष की तुलना में मजबूत होता है। प्रत्येक दोष शरीर के अलग अलग कार्य को नियंत्रित करता है। आयुर्वेद में यह माना जाता है कि आपके बीमार होने की संभावना आपके दोषों के संतुलन से जुड़ी हैं।

वात दोष (Vata Dosha in Hindi)

आयुर्वेद उपचार (Healing with Ayurveda) में यह माना जाता है कि वात दोष तीनो दोषों में सबसे शक्तिशाली होता है। वात दोष शरीर के बहुत ही बुनियादी कार्यों को नियंत्रित करता है, जैसे कोशिका विभाजन। वात दोष आपके दिमाग, रक्त प्रवाह, हृदय क्रिया, श्वास, और आपकी आंतों के माध्यम से अपशिष्ट से छुटकारा पाने की क्षमता को भी नियंत्रित करता है।

यदि आपकी मुख्य जीवन शक्ति वात दोष (Vata Dosha) है, तो आपको चिंता, हृदय रोग, अस्थमा, त्वचा की समस्याओं और संधिशोथ जैसी स्वास्थ्य समस्याओं के विकसित होने की अधिक संभावना होती है।

पित्त दोष (Pitta Dosha in Hindi)

आयुर्वेद उपचार (Ayurvedic Healing) में पित्त दोष ऊर्जा आपके पाचन, चयापचय और कुछ हार्मोन को नियंत्रित करते हैं जो आपकी भूख से संबन्धित होते हैं।

यदि यह आपकी मुख्य जीवन शक्ति पित्त दोष (Pitta Dosha) है, तो आपको क्रोहन रोग, हृदय रोग, उच्च रक्तचाप और संक्रमण जैसी स्वास्थ्य समस्याओं के विकसित होने की अधिक संभावना होती है।

कफ दोष (Kapha Dosha in Hindi)

कफ दोष जीवन शक्ति शरीर की ताकत, मांसपेशियों की वृद्धि, स्थिरता, वजन और आपकी प्रतिरक्षा प्रणाली को नियंत्रित करती है।

यदि Kapha Dosha ऊर्जा आपकी मुख्य जीवन शक्ति है, तो आपको अस्थमा और अन्य श्वास संबंधी विकार, कैंसर, मधुमेह, खाने के बाद मतली और मोटापा होने की संभावना होती है।

आयुर्वेदिक उपचार (Ayurveda Treatment in Hindi)

आयुर्वेदिक उपचार (Ayurvedic Healing) इस बात पे निर्भर होता है कि आपमें कौन सी जीवनी शक्ति (वात, पित्त या कफ) प्रवल है। आयुर्वेदिक चिकित्सक इसी के अनुसार उपचार योजना तैयार करते है।

उपचार का लक्ष्य जीवन शक्ति और इन तीनों तत्वों के बीच संतुलन स्थापित करना होता है। इसमें शारीरिक शुद्धि पर विशेष ध्यान दिया जाता है। आयुर्वेद में सफाई प्रक्रिया को “पंचकर्म” (Panchkarma) कहा जाता है। आयुर्वेद उपचार (Ayurvedic Healing) में रक्त शोधन, मालिश, चिकित्सा तेल, जड़ी-बूटियों और एनीमा मुख्य होता है।

आइये जानते है कुछ सामान्य स्वास्थ्य स्थितियों को जिन्हे आयुर्वेद द्वारा प्रबंधित किया जा सकता है:

1. Digestive disorders Healing with Ayurveda

अधिकांश लोगों को कई प्रकार की पाचन समस्याओं (digestive problems) जैसे अपच (indigestion), एसिड रिफ्लक्स या कब्ज (acid reflux or constipation), पेट फूलने (flatulence) की समस्या बनी रहती है। आयुर्वेद (Ayurveda) के अनुसार इन समस्याओं की जड़ शरीर में विषाक्त पदार्थों (toxins) के जमा होने के कारण होता है, जिसे अमा कहा जाता है। पाचन समस्या नियमित समय पर भोजन ना करना, कमजोर पाचन तंत्र या गलत आहार लेने के कारण होता है।

आयुर्वेद के अनुसार पित्त गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल ट्रैक्ट के लिए जिम्मेदार होता है तथा भोजन को पचाने के लिए एसिड और एंजाइम की गतिविधियों पर नियंत्रण रखता है। अगर आपके पित्त दोष में कोई असंतुलन हो जाये तो यह पाचन संबन्धी समस्याओं को जन्म देता है। आप आहार में परिवर्तन कर और आयुर्वेदिक औषधियों (Ayurveda medicines) का उपयोग कर अपने पाचन से संबन्धित विकारों दूर कर सकते है, तथा अपनी आंत को भी स्वस्थ रख सकते है।

2. Ayurveda Treatment of Respiratory disorders

आज की जो जीवन शैली है, तनाव का जो स्तर और प्रदूषण के कारण श्वसन संबंधी समस्याओं (respiratory problems) में वृद्धि हुई है। श्वसन संबंधी समस्याओं में सांस फूलना, सर्दी (cold), खांसी (cough ) ब्रोंकाइटिस (bronchitis), अस्थमा (asthma) या वातस्फीति तक होती हैं।

आयुर्वेद (disorders) में श्वसन तंत्र से संबन्धित विकार कफ दोष में असंतुलन के कारण होते है। श्वसन संबंधी समस्याओं के लिए आयुर्वेदिक उपचार (Ayurvedic treatment) सबसे प्रभावी होता है। आयुर्वेदिक उपचार (Healing with Ayurveda) से कफ दोष संतुलित होता है, जिससे श्वसन संबन्धी विकार के मूल कारण को ठीक किया जाता है। आयुर्वेदिक दवा के इस्तेमाल (Use of Ayurveda medicine) से व्यक्ति में रोग प्रतिरोधक क्षमता भी बढ़ता है।

3. Stress and anxiety Healing with Ayurveda

तंत्रिका तंत्र (nervous system) से संबन्धित विकार वात दोष से संबन्धित होता है। वात दोष असंतुलित हो जाने पर व्यक्ति में चिंता, तनाव के लक्षण दिखाई देने लगते है। आयुर्वेदिक चिकित्सा (Healing with Ayurveda) से आप वात दोष को संतुलित कर सकते है। आयुर्वेदिक जड़ी बूटियों (Ayurveda herbs) के इस्तेमाल से वात दोष को संतुलित कर मन, शरीर और आत्मा को शांत तथा मानसिक कार्यों पर सकारात्मक प्रभाव डाला जा सकता है।

4. Skin problems

स्वस्थ त्वचा तथा त्वचा विकारों के लिए आयुर्वेदिक उपचार (Healing with Ayurveda) सबसे अच्छा माना गया है। चाहे बात आंतरिक सफाई की हो या बहरी उपयोग की प्राकृतिक उपचार (natural remedies) सर्वोत्तम होता है। आयुर्वेदिक दवा (Ayurveda medicine) उन दोषों के उपचार पर काम करती है त्वचा रोग के कारण बनते है।

आयुर्वेद के अनुसार असंतुलित वात दोष वाले व्यक्ति की त्वचा शुष्क, पतली, नाजुक और झुर्रीदार होती है। असंतुलित पित्त दोष वाले व्यक्ति की त्वचा पर चकत्ते या टूटने की संभावना अधिक होती है। असंतुलित कफ दोष वाले लोगों की त्वचा मोटी और तैलीय होती है।

5. Ayurveda Treatment of Diabetes

भारत में मधुमेह (Diabetes) काफी तेजी से बढ़ता जा रहा है। अभी भी एलोपैथ में इसका पूर्ण निदान नहीं है। एलोपैथिक दवाओं के दुष्प्रभाव के कारण मधुमेह और जटिल होता जा रहा है। मधुमेह को ठीक करने के लिए आयुर्वेदिक उपचार (Healing with Ayurveda) बिना किसी दुष्प्रभाव के सबसे प्रभावी तरीका है।

आयुर्वेदिक चिकित्सा अत्यंत प्रचीन भारतीय खजाना है। इसका सबसे बड़ा लाभ यह है कि यह बिना किसी दुष्प्रभाव के बीमारी के मुख्य कारण को जड़ से खत्म करता है। आयुर्वेद के द्वारा हम सभी अपने जीवन, सिस्टम में संतुलन और सामंजस्य स्थापित कर सकते है।

आयुर्वेदिक चिकित्सा (Ayurveda Treatment) या किसी अन्य वैकल्पिक चिकित्सा उपचार (Ayurvedic Healing) लेने से पहले हमेशा अपने डॉक्टर से सलाह जरूर लेनी चाहिए।

Leave a Comment