Cell Kya Hai कोशिका की संरचना कैसे होती है?

दोस्तों आज के इस आर्टिकल में हम यह जानेंगे कि Cell Kya Hai और कोशिका की संरचना कैसे होती है? Cell के बारे में बहुत सी बातें ऐसी है जो की काफी कम लोगो को ही पता है। उन सभी बातो पर हम आज Details में चर्चा करने जा रहे है। तो चलिए शुरू करते है।

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कोशिका क्या है (Cell Kya Hai)?

हमारा शरीर कई सूक्ष्म इकाइयों से मिलकर बना है, जिसे कोशिका कहते है। कोशिका (Cell) शरीर की सबसे छोटी इकाई है। यह शरीर क्रियात्मक और रचनात्मक इकाई है। कोशिका (Cell) जीवद्रव्य (Protoplasm) का एक छोटा सा खण्ड है।

जो कोशिका कला (Cell Membrane Kya Hai इसपे आगे चर्चा होगी) के भीतर बंद होता है। एक सजीव शरीर में जितनी भी क्रियाएं होती है वे सभी क्रियाएँ Cell में भी होती है।

कोशिका की संरचना कैसी होती (Cell Structure Kaisi Hoti Hai)?

Cell का आकार अतिसूक्ष्म होता है। इसकी आकृति बिभिन्न प्रकार की होती है जैसे – गोलाकार (Round Shape), अंडाकार (Oval), स्तंभाकार (Columnar) आदि। कोशिका (Cell) रोमकयुक्त (Hairy), कशाभिकायुक्त (Pharyngeal) तथा बहुभुजीय (Polygonal) होती है।

सभी प्रकार के पादप और जन्तुओं की कोशिकाओं की संरचना लगभग लगभग एक जैसी होती है कुछ भिन्ताओं को छोड़कर। एक कोशिका की संरचना मुख्यतः तीन भागों से बनी होती है – केन्द्रक, कोशिका कला और कोशिका द्रव्य।

कोशिका कला क्या होता है (Cell Membrane Kya Hai)?

इसे कोशिका झिल्ली भी कहा जाता है। कोशिका कला एक वरणात्मक झिल्ली (Selective Membrane) के रूप में कार्य करती है। इसका कार्य चलनी की तरह होता है जिसके फलस्वरूप कोशिका के भीतर कुछ पदार्थ ही प्रविष्ट हो पाते है।

कोशिका कला (Cell Membrane) से कुछ ही पदार्थ ही जैसे – आक्सीजन (Oxygen), जल (Water), शर्करा (Glucose) तथा कार्बन डाइआक्साइड (Carbon Dioxide) आदि इसके आर-पार जा सकते है। कोशिका झिल्ली इन पदार्थो को कोशिका के भीतर आने जाने पर नियंत्रण रखती है।

इस प्रकार जीवद्रव्य (Protoplasam) की उचित रासायनिक संरचना बनाए रखने में सहायक होता है। कोशिका कला (Cell Membrane) का निर्माण तीन परतों से मिलकर होता है। इसकी भीतरी और बाहरी परतें प्रोटीन से बनी होती है।

वही मध्य परत का निर्माण लिपिड या वसा से होता है। यह सेल की आकृति का निर्माण करती है तथा जीव द्रव्य (Protoplasm) की सुरक्षा करती है।

कोशिका द्रव्य क्या होता है (Cytoplasm Kya Hota Hai)?

जीवद्रव्य (Protoplasm) के केन्द्रक तथा कोशिका कला के मध्य के भाग को अथार्त कोशिका कला के भीतर तथा केन्द्रक के बाहर चारों ओर से घेरने वाले भाग को कोशिका द्रव्य (Cytoplasm) कहते है।

कोशिका द्रव्य जेलीनुमा (Jelly), रवेदार (Granular), चिपचिपा (Gummy), पारदर्शी (Transparent) तथा अर्धतरल (Semi-fluid) पदार्थ होता है। यह लगभग कोशिका के 70% भाग की रचना करता है। Cytoplasm की संरचना कार्बनिक तथा अकार्बनिक ठोस पदार्थों तथा जल से हुई है।

जीवद्रव्य क्या होता है (Protoplasm Kya Hota Hai)?

इसमें एक रंगहीन चिपचिपा गाढ़ा द्रव्य होता है जिसमें 60 से 70 प्रतिशत जल की मात्रा होती है। जीवद्रव्य में जल के अतिरिक्त 15 प्रतिशत प्रोटीन और 13 प्रतिशत कार्बोहाइड्रेट्स होता है। इसमें वसा की मात्रा अपेक्षाकृत कम होता है। इसमें विटामिन भी पाये जातें है।

जीवद्रव्य में हार्मोन भी होते है जो शरीर विभिन्न अंगों में होने वाली क्रियाओं पर नियंत्रण रखते है। इसमें काफी मात्रा में खनिज लवण भी जातें है। इसमें ऑक्सीजन और कार्बनडाईआक्साइड गैस भी पाई जाती है जो श्वसन के लिए अतिआवश्यक होती है।

इसमें हमेसा सभी जैविक क्रियाएँ जैसे श्वसन, वृद्धि, गतिशीलता, उत्तेजना, प्रजनन तथा उत्सर्जन आदि होती रहती है। अगर बाहर से इसे स्पर्श किया जाए अथवा सुई चुभाने पर या करेंट लगने आदि क्रिया होने पर जीव द्रव्य सिकुड़ जाता है। और कुछ समय बाद यह पुनः सामान्य अवस्था में आ जाता है।

किसी कारण से अगर जीवद्रव्य नष्ट हो जाए तो शरीर की सभी क्रियाएँ तुरंत रुक जाती है जिससे मृत्यु हो जाती है। Cytoplasm के अंदर कई प्रकार की संरचनाएँ होती है जो जीवद्रव्य के अंदर होती है।

माइटोकॉन्ड्रिया क्या होता है (Mitrochondria Kya Hota Hai)?

इसे सूत्रकणिका भी कहते है। यह कोशिकाद्रव्य में उपस्थित दोहरी झिल्ली से घिरा रहता है। यह 2 माइक्रोमीटर चौड़े तथा 4 माइक्रोमीटर लम्बे होते है। जिन्हे माइक्रोस्कोप से जीवद्रव्य में घूमते फिरते देखा जा सकता है।

सूत्रकणिका के आकार में परिवर्तन होता रहता है। इनके भीतर श्वसन एंजाइम पाये जाते हैं। जिनकी सहायता से ये कोशिका के भीतर पच कर आये भोजन का आक्सीकरण करके उसकी संग्रहित शक्ति को गतिजशक्ति में बदलते रहते है।

जिससे कोशिका को कार्य (Cell के कार्य Kya Hai इस पे आगे चर्चा होगी) करने की शक्ति मिलती रहती है। इसी कारण से Mitrochondria को शक्तिगृह या पावरहाउस भी कहा जाता है। माइटोकाण्ड्रिया के भीतर डीएनए (DNA) होता है, जिसकी रचना एवं आकार जीवाणुओं के डीएनए के समान है।

गॉल्जी उपकरण क्या है (Golgi Apparatus Kya Hai)?

इसे गॉल्जी काय या गॉल्जी बॉडी भी कहा जाता है। यह एक नली के सदृश सूक्ष्म अवयव है। जो केन्द्रक (Nucleus) के समीप स्थित रहने वाली एक सूक्ष्मनलिकाकार झिल्ली नुमा रचना होती है।

इसमें धागे के समान कई सूक्ष्म लघुकोश होते है। जिनकी कोशिका के स्राव क्रिया से सम्बन्ध होता है। गॉल्जी काय का निर्माण छोटे-छोटे वेसिकल, थैलीनुमा सिस्टर्नी तथा बड़े-बड़े वैकुओल से मिलकर होता है। गॉल्जी उपकरण कोशिका के अन्दर स्रावित पदार्थो के संग्रह एवं परिवहन में सहायता करता है।

सेन्ट्रोसोम क्या होता है (Centrosome Kya Hota Hai)?

इसे तारककाय (Centrosome) भी कहते है। तंत्रिका कोशिका को छोड़कर प्रायः सभी प्रकार के प्राणिकोशिका में साइटोप्लाज्म का यह सघन पिण्ड न्यूक्लियस के समीप स्थित होता है। इसमें एक या दो और गाढ़ी रचनाएँ होती है जिन्हें सेन्ट्रिओल कहा जाता है।

सेन्ट्रोसोम के मुख्य दो भाग होते हैं, एक को सेन्ट्रिओल और दूसरे को सेन्ट्रोस्फीयर कहते हैं। सेन्ट्रिओल सेन्ट्रोसोम के मध्य में दो स्वच्छ, घनीभूत कणिकाओं के रूप में होता हैं। सेन्ट्रिओल के चारो जो गाढ़ा कोशिकाद्रव्य रहता है, उसे सेन्ट्रोस्फीयर कहा जाता है।

सेन्ट्रोसोम और सेन्ट्रिओल दोनों मिलकर कोशिका विभाजन (Cell Division Kya Hai इसपे आगे चर्चा होगी) का कार्य करती है।

लाइसोसोम क्या होता है (Lysosome Kya Hota Hai)?

यह कोशिका द्रव्य में अण्डे जैसी सूक्ष्म रचनाएँ होती है। Lysosome में कई प्रकार के महत्वपूर्ण एन्जाइम की उत्पत्ति होती है। जो कोशिका के भीतर बडे अणुओं को छोटे-छोटे खण्डों में विभाजित करने में सहायता करती है।

जिससे त्याज्य पदार्थ कोशिका से बाहर निकल जाते है जैसे – कार्बोहाइड्रेट्स, प्रोटीन्स, RNA, DNA आदि। लाइसोसोम सूक्ष्म जीवाणुओं को नष्ट करने का कार्य करती है। यह रोग प्रतिरोधक क्षमता के लिए भी आवश्यक होता है।

रिक्तिकाएँ क्या होता है (Vecuoles Kya Hota Hai)?

इसे रसधानी भी कहा जाता है। रिक्तिकाएँ (रसधानी ) पादप और जन्तु कोशिकाओं के कोशिका द्रव में पायी जाने वाली रचना है। यह कोशिका द्रव्य में छोटे -छोटे रिक्त स्थान होतें है। इनमें जल के समान द्रव्य भरा होता है।

जो टोनोप्लास्ट नामक आवरण से घिरा होता है इन्हें रिक्तिकाएँ या रसधानी कहते है। रिक्तिकाएँ या रसधानी जीवद्रव्य में जल पर नियंत्रण रखती है। रिक्तिकाएँ कोशिकाद्रव्य में जल की मात्रा अधित हो जाने पर जल को बाहर निकाल देने में सक्षम होता है।

एन्डोप्लाज्मिक रैटिकुलम (Endoplasmic Reticulum Kya Hota Hai)?

इसे आन्तरद्रव्य जालिका या अंतःप्रद्रव्यजालिका कहते है। यह कोशिकाद्रव्य में छोटी-छोटी नलिकाओं की एक श्रृंखला होती है। इनमें स्टेरॉयड हार्मोन का निर्माण होता है। एन्डोप्लाज्मिक रैटिकुलम दो प्रकार के होते है, एक प्रकार में इनके अन्दर राइबोसोम भरे होतें है।

जो राइबोन्यूक्लिक एसिड से बने होतें है। इनमें कुछ ऐसे प्रोटीन बनते है जो औषधियों के निविर्षिकरण में सहायक होते है। इसका दूसरा प्रकार राइबोसोम रहित होता है। यह अन्तर्द्रविक जालिका पर संश्लेषित किए प्रोटीन कोशिका को बाहर भेजने का कार्य करता हैं।

राइबोसोम क्या होता है (Ribosome Kya Hota Hai)?

यह कोशिका द्रव्य में माइटोकॉन्ड्रिया से छोटी रचना होती है जो गुच्छों के रूप में विकसित होती है। राइबोसोम माइटोकाण्ड्रिया में, क्लोरोप्लास्ट में तथा एण्डोप्लाज्मिक रेटिकुलम के ऊपरी सतह पर भी पाये जाते हैं। राइबोसोम प्रोटीन के निर्माण तथा लिपिड के उपापचयी क्रियाओं में सहायक होती है।

ये जेनेटिक्स पदार्थों (DNA या RNA) के संकेतों को प्रोटीन शृंखला में परिवर्तित करते हैं। यह एक राईबोस न्यूक्लिक अम्ल (MRNA) संदेशधारक के साथ जुड़े रहता है। जिसमें किसी विशेष प्रोटीन के निर्माण के लिए आवश्यक अमीनो अम्ल को सही क्रमानुसार में लगाने का सूचना मौजूद होता है।

कण क्या होता है (Granules Kya Hota Hai)?

यह कोशिका द्रव्य में शरीर में कोई असामान्य क्रिया होने पर एक कण की तरह उत्पन्न होतें है। यह विशेष प्रकार की रचना होती है। जो कोशिका द्रव्य संकुचन को प्रकट करती है।

केन्द्रक या न्यूक्लियस क्या होता है (Cell Nucleus Kya Hai)?

यह प्रोटोप्लाज्मका एक सघन पिण्ड होता है। प्राणियों, वनस्पतियों,और सुकेन्द्रिक जीवों की अधिकांश कोशिकाओं में यह केन्द्रक कला से घिरा होता है। आपको जानकर यह हैरानी हो सकती है कि स्तनधारियों की लाल रक्त कोशिकाओं में कोई केन्द्रक नहीं होता है।

जबकि ओस्टियोक्लास्ट Cell में कई केन्द्रक होते हैं। वही सुकेन्द्रिक जीवों की हर कोशिका में अधिकतर एक केन्द्रक होता है। केन्द्रक कला भी कोशिका की कला भांति वर्णात्मक रूप से सछिद्र होती है। जिसके फलस्वरूप विशिष्ट पदार्थ ही इसके आर-पार प्रवाहित हो पाते है।

न्यूक्लियस कोशिका की सभी क्रिआओं को नियंत्रित करता है तथा इसके बिना कोशिका जीवित नहीं रह सकती। केन्द्रक के चार भाग होतें है क्रोमोसोम, केन्द्रकीय कला, केन्द्रक द्रव्य तथा उपकेन्द्रक।

क्रोमोसोम क्या होता है (Chromosomes Kya Hota Hai)?

केन्द्रक के भीतर के पदार्थ में कुछ धागे के सामान अवयव होते है जो मुख्यतः प्रोटीन से बने होते है। ये सूत्र-सम अवयव क्रोमोसोम या गुणसूत्र कहलाते है। कोशिका जब विश्राम प्रावस्था होता है तो ये सूत्र एक गुच्छे के रूप में रहते है। और संयुक्त रूप से ये क्रोमोटिन कहलाते है।

Cell में होने वाली सभी क्रियाएँ इन्ही के द्वारा नियंत्रित होती है और मनुष्यों में आनुवंशिक लक्षण (Hereditary Characteristics) इन्हीं पर निर्भर होते है। इन क्रोमोसोमों (Chromosomes) पर अनेक जीन (Gene) लड़ी के रूप में विधमान होते हैं।

जीन ही वे सूक्ष्म अवयव हैं जिनमें आनुवंशिक लक्षण निहित होते हैं। प्राणियों की प्रत्येक जाती में कोशिकाओं (Cell) के क्रोमोसोमों (Chromosomes) की संख्या निर्धारति होती है। मनुष्य में यह संख्या 46 तेईस जोड़ी होती है।

केन्द्रकीय कला क्या होता है (Nuclear Membrane Kya Hota Hai)?

यह केन्द्रक (Nucleus) के चरों ओर से घेरे रहने वाली दो परतों वाली झिल्ली होती है। जिसके द्वारा यह केन्द्रक को कोशिकाद्रव्य या साइटोप्लाज्म (Cytoplasm) से अलग रखता है। केन्द्रकीय कला (Nuclear Membrane) में जगह जगह पर कई छोटे सूक्ष्म छिद्र होतें है।

जिनसे वस्तुओं का केन्द्रक (Nucleus) से कोशिका द्रव्य (Cytoplasm) की ओर या कोशिका द्रव्य से केन्द्रक (Nucleus) की ओर आदान-प्रदान होता है। केंद्रीय कला (Nuclear Membrane) इन वस्तुओं पर पूर्ण रूप से नियंत्रण रखने में सक्षम होती है।

केन्द्रक द्रव्य क्या होता है (Nucleoplasm Kya Hota Hai)?

Nuclesu के भीतर एक द्रव्य भरा होता है जिसे केन्द्रक द्रव्य (Nucleoplasm) कहतें है। यह जीव द्रव्य (Protoplasm) का ही भाग होता है। इसके सभी कार्य जीव द्रव्य की तरह ही होते है।

अथार्त कोशिका (Cell) में केन्द्रक (Nucleus) में रहने वाले द्रव्य को केन्द्रक द्रव्य (Nucleoplasm) और केन्द्रक (Nucleus) के बाहर रहने वाले द्रव्य को कोशिका द्रव्य (Cytoplasm) कहा जाता है।

उपकेन्द्रक क्या है (Nucleolus Kya Hota Hai)?

केन्द्रक (Nucleus) के भीतर एक छोटी सी सघन और गोल सी रचना पाई जाती है। जिसे उपकेन्द्रक या न्यूक्लिओलस (Nucleolus) कहते है। इसका कार्य Cell के भीतर प्रोटीन (Protein) से सम्बंधित होता है।

कोशिका के कार्य क्या होता है (Function Of Cell)

Cell के कार्य Kya Hai इसको आप इस तरह से समझ सकते है। Cell जीवन की इकाई है। सभी प्राणियों जीवो एवं वनस्पतियों के जितने मूल गुण होते है वे सभी इसमें पाए जाते हैं।

इन गुणों में आत्म-रक्षण (Self-Preservation) तथा प्रजनन (Reproduction) भी शामिल है। Cell के कार्य (Function Of Cell) निम्न है-

अन्तग्रहण और स्वांगीकरण (Cell Ingestion and Assimilation)

कोशिका Cell के चारों ओर एक अंतराकोशिका तरल (Interstitial Fluid) होता है। जिसमें एमिनों एसिड (Amino Acid) आदि अनेक पदार्थ होते है। जो मनुष्य द्वारा ग्रहण किए गए भोजन के पचने से बनते है।

Cell इन पदार्थो को ग्रहण करके उनसे प्रोटीन (Protein) आदि अनेक ऐसे जटिल पदार्थ बनाती है। जिनसे मिलकर प्रोटोप्लाज्मा (Protoplasm) का निर्माण होता है।

इससे स्पष्ट है की सेल (Cell) या कोशिका पोषक पदार्थो के अवशोषण तथा स्वांगीकरण (Cell Ingestion and Assimilation) में अध्यधिक सक्रिय होती है।

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विकास और मरम्मत (Cell Growth and Repair)

कोशिका जिन पोषक तत्वों को ग्रहण करती है उनका उपयोग दो प्रकार से कर सकती है। पहला, इन तत्वों से नया प्रोटोप्लाज्म (Protoplasm) बनाना तथा इस प्रकार कोशिका का आकर बढ़ता है और उसका विकास होता है।

दूसरा, इन पोषक तत्वों से कोशिका (Cell) के जो भाग क्षतिग्रस्त हो गए हो अथवा टूट-फुट गए हों उनका निर्माण अथवा मरम्मत। इन दोनों प्रक्रियाओं, कोशिका के विकास तथा विरोहण या मरम्मत (Cell Growth and Repair) को संयुक्त रूप में उपचय या एनाबोलिज़्म (Anabolism) कहा जाता है।

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चयापचय (Cell Metabolism)

इसका मतलब उन सभी क्रियाओं से है जो एक कोशिका Cell में होती है। चयापचय (Metabolism) क्रियाएँ दो प्रकार की होती है। पहला निर्माणकारी अथवा एनाबोलिक (Anabolic), तथा दूसरा विघटनकारी अथवा अपचय (Catabolism) क्रिया।

इस क्रिया द्वारा कोशिका उन पोषक तत्वों का ईंधन के रूप में प्रयोग करती है। जिन्हें वह अपने वातावरण से ग्रहण करती है। इन तत्वों के जलने से जो ऊर्जा या शक्ति प्राप्त होती है। उसका उपयोग अनेक प्रकार से होता है।

उदाहरणतः शरीर को गर्मी प्रदान करने के लिए , गति के लिए, ग्रंथियों से रस की उत्पति के लिए तथा तंत्रिकाओं के क्रिया के लिए। ये सभी चयापचय (Metabolism) मोटाबॉलिज्म की क्रिया से ही सम्बंधित होता है।

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श्वसन (Cell Respiration)

कोशिका इस क्रिया द्वारा उस आक्सीजन को ग्रहण करती है जो फेफड़े वायु से ग्रहण करते है। तथा जो रक्त के माध्यम कोशिका तक पहुँचती है।

कार्बन डाइआक्साइड कोशिका से अपशिष्ट उत्पाद (Waste Product) के रूप में बाहर निकलती है। यह श्वसन क्रिया कोशिका की क्रिया तथा उसके स्वास्थ्य और जीवन के लिए अत्यावश्यक है।

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उत्सर्जन (Cell Excretion)

Waste Product कोशिका से रक्त तक अन्तरा कोशिका तरल के माध्यम से पहुँचती है। रक्त में पहुंचने के पश्चात कार्बोनिक एसिड (कार्बन डाइआक्साइड के रूप में ) फेफड़ों द्वारा निष्कासित होती है।

तथा अन्य पदार्थ गुर्दो की क्रिया से मूत्र में बाहर निकल जाते हैं। यह क्रिया उत्सर्जन (Cell Excretion) क्रिया कहलाती है।

क्षोभशीलता और चालकता (Cell Irritability and Conductivity)

Irritability and Conductivity कोशिका के दो मुख्य गुण है जिनके फलस्वरूप कोशिका सक्रिय रहती है। कोशिका को उद्दीप्त (Stimulate) करने पर सदा उसकी अनुक्रिया प्रकट होती है। उद्दीपन या स्टिमुलस का रूप रासायनिक, भौतिक, मेकैनिकल या तान्त्रिकात्मक (Nervous) कैसा भी हो सकता है।

उदाहरणतः कोशिका का संकुचन (यथा अमाशय अग्रयाशय ग्रन्थयों आदि में ) तथा कोशिका में आवेग संचार (यथा तंत्रिका कोशिका) वास्तव में जब भी कोशिका उद्दीपन के फलस्वरूप उत्तेजित होती है।

तो उसमें एक छोर से दूसरे छोर तक आवेग का संचार सदैव होता है। तथापि इस आवेग का सर्वोतम उदाहरण तंत्रिका कोशिकाएँ हैं जिनके तंत्रिका तन्तु (Nerve Cells) एक मीटर या इससे भी लम्बे होते है।

कोशिकीय विभाजन (Cell Division Kya Hai)

क्या आपको यह पता है जब तक जीवधारी जीवित रहता है। कोशिकाएँ लगातार विभाजित होती रहती है। अनेक कोशिकाओं का निर्माण निरंतर होता रहता है। कोशिका विभाजन की आवश्यकता उस समय ज्यादा बढ़ जाती है जब जीवधारी को कोई रोग हो जाता है।

नई कोशिकाओं का निर्माण अत्यधिक आवश्यकता पड़ने पर अधिक मात्रा में होता है। जो कोशिकीय विभाजन के फलस्वरूप होता है। कोशिका पूर्ण विकसित होने के पश्चात दो भागों में बंट जाती है। एक को सूत्रीय विभाजन तथा दूसरे को अर्ध विभाजन कहते है।

सूत्रीय विभाजन (Mitosis or Karyokinesis Kya Hai)

प्रजनन (Reproduction) शारीरिक विकास की प्रक्रिया में, कोशिका के आकार में वृद्धि एक सीमा तक ही हो सकती है। पूर्णतः विकसित होने के आवश्यकता, टूटी-फूटी तथा रोग द्वारा विनष्ट कोशिकाओं के स्थान पर नई कोशिकाएँ स्थापित करने के लिए जो प्रयोजन होता है। उसे सामान्य कोशिका विभाजन सूत्री विभाजन कहलाता है।

इस विभाजन में प्रत्येक कोशिका से उसी की तरह आकार-प्रकार की दो अलग अलग कोशिकाओं की उत्पत्ति होती है। जिनमे क्रोमोसोम की संख्या 46 होती है। विभाजन क्रिया का आरम्भ न्यूक्लियस से होता हैं न्यूक्लियस कला लुप्त हो जाती है। क्रोमेटिन लंबे धागों के समान क्रोमोसोमों में बट जाता है।

सेंट्रोसोम दो में विभक्त हो जाते है तथा प्रत्येक नया सेंट्रोसोम कोशिका के एक ध्रुव या छोर पर पहुँच जाता है। तदनन्तर क्रोमोसोम प्रत्येक ध्रुव स्थित सेंट्रोसोम की ओर खिंच कर चले आते है।

तथा पुनः विश्रांति प्रावस्था के समान क्रोमेटिन का रूप धारण कर लेते है। अंततः कोशिका के मध्य में प्रोटोप्लाज्म सिकुड़ने लगता है और दो में विभक्त हो जाता है।

फलस्वरूप दो नई कोशिकाएँ प्रकट हो जाती है। इन कोशिकाओं में से प्रत्येक में 46 क्रोमोसोम होते है। स्पष्ट है कि माइटोसिस की प्रिक्रिया में क्रोमोसोमों की संख्या दुगुनी हो जाती है।

ऐसा किस प्रकार होता है इस सम्बन्ध में बहुत कम जानकारी प्राप्त है। निषेचन के समय जब डिम्ब और शुक्राणु के मिलने से जाइगोट नामक नई कोशिका बनती है तो उसमें 46 क्रोमोसोम होते हैं।

यही जाइगोट आगे चलकर एक पृथक जीव के रूप में विकसित है। नर और मादा, दोनों से आधे क्रोमोसोम प्राप्त करने फलस्वरूप नवविकसित जीव दोनों के आनुवंशिक गुण आ जाते है। सूत्रीय विभाजन की चार अवस्थाएँ होती है पूर्वावस्था, मध्यावस्था, तृतीय अवस्था तथा अंतिम अवस्था या अन्त्यावस्था।

पूर्वावस्था (Prophase Kya Hota Hai)

इस अवस्था में केन्द्रकीय पदार्थ गाढ़ा होकर छोटे-छोटे दानों के रूप में बदल जाता है। यह दानें धीरे-धीरे बढ़कर बड़े हो जातें है और आपस में जुड़कर क्रोमेंटिन सूत्र बना लेतें है। इसी समय केन्द्रकीय कला लुप्त हो जाती है और सेंट्रोसोम भी दो भागों में बट जाता है।

केन्द्रकीय पदार्थ के और लगातार गाढ़ा होते जाने से क्रोमेटिन सूत्र अधिक मोटे और छोटे हो जाते हैं। केन्द्रकीय कला के खत्म हों जाने से क्रोमेटिन सूत्र कोशिका द्रव्य में चले जातें हैं ।

जहां से यह लम्बाई में दो भागों में विभक्त हो जाता जो एक दूसरे के पास ही स्थित होतें है। यही बाद में अलग-अलग कोशिकाओं में क्रोमोसोम के रूप में स्थित हो जातें है।

मध्यावस्था (Metaphase Kya Hota Hai)

इस अवस्था में क्रोमोसोम कोशिका की एक लम्बी रेखा के साथ व्यवस्थित हो जाती है। एक कोशिका से दो कोशिका बनने पर यह अवस्था समाप्त हो जाती है।

तृतीय अवस्था (Anaphase Kya Hota Hai)

इस अवस्था में विभक्त कोशिका के क्रोमोसोम दूर दूर तक चले जाते है। इसी समय दोनों कोशिकाओं के मध्य में एक हल्की सी परत का निर्माण शुरू हो जाता है । जो धीरे धीरे दोनों कोशिकाओं का विभाजन तय कर देता है।

अंतिम अवस्था या अन्त्यावस्था (Telophase Kya Hota Hai)

इस अवस्था में क्रोमोसोम में इकठ्ठा हुआ केन्द्रकीय पदार्थ समान रूप से फैल जाता है। जिसके बाद एक उपकेन्द्रक तथा केन्द्रकीय कला प्रकट जो जाती है तथा केन्द्रक बन जाता है। इसमें कोशिका पूर्ण रूप से दो भागों में बंट जाता है जिससे दो अलग अलग नई कोशिका का जन्म हो जाता है।

अर्ध विभाजन (Cell Meiosis Kya Hai)

इस प्रकार का कोशिका विभाजन प्रजनन कोशिकाओं में होता है। इन कोशिकाओं में 23 क्रोमोसोम का एक गुच्छ होता है। जनन कोशिकाएँ दो क्रमबंध विभाजन के दौरान नई कोशिकाओं में बंट जाती है। जिनके केन्द्रक में रहने वाले 46 क्रोमोसोम अलग अलग 23 क्रोमोसोम में बंट जाते है।

जब गर्भाधान होता है तब पुरुष के शुक्राणु एवं स्त्री के डिम्ब के केन्द्रक आपस में संयुक्त होकर एक जाइगोट का निर्माण करती है। जिसमें पुरुष के शुक्राणु के 23 क्रोमोसोम स्त्री के डिम्ब के 23 क्रोमोसोम आपस में मिलकर 46 क्रोमोसोम का एक गुच्छ बन जाता है।

 

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