Hridaya Mudra कैसे करते है? हृदय मुद्रा के लाभ

दोस्तों आज का लेख “Hridaya Mudra कैसे करते है?” के बारे में है। योग मुद्राओं में हृदय मुद्रा एक बहुत ही शक्तिशाली मुद्रा है। इस योग मुद्रा का नियमित अभ्यास हृदय रोग में लाभ देता है। हृदय मुद्रा का हमारे ह्रदय और मस्तिष्क पर काफी सकारात्मक प्रभाव पड़ता है। तो चलिए हृदय मुद्रा के बारे में विस्तार से जानते है।

हृदय मुद्रा – Hridaya Mudra in Hindi

जैसा की इस योग मुद्रा का नाम है हृदय मुद्रा, ह्रदय को स्वस्थ रखने के लिए, इसका अभ्यास किया जाता है। हृदय रोग के लिए एक अच्छा व्ययाम है ह्रदय मुद्रा। हृदय रोग Heart Disease से बचने के लिए हृदय मुद्रा का अभ्यास किया जाता है।

हृदय मुद्रा करने की विधि – Hridaya Mudra Steps in Hindi

इस मुद्रा का अभ्यास बहुत ही सरल व् आसान है। हृदय मुद्रा को कहीं भी और कभी भी किया जा सकता है। लेकिन जब वातावरण में प्राण वायु अधिक हो तब इसे करने से ज्यादा लाभ मिलता है। हृदय मुद्रा अभ्यास रोग की गम्भीर स्थिति में भी कर सकते है। तो चलिए जानते है हृदय मुद्रा करने की सही विधि क्या है –

Hridaya Mudra

सबसे पहले ध्यान के किसी आसन जैसे- सुखासन, पद्मासन या वज्रासन में आराम से बैठ जाये।

अपने सिर और मेरुदण्ड को सीधा रखें।

दोनों हाथों को घुटनों पर रखें।

आँखों को बन्द कर गहरी श्वसन करे और पुरे शरीर को शिथिल करें।

अब ज्ञान मुद्रा या चिन मुद्रा के समान तर्जनी उँगलियों के पोरों के अंगूठों के मूल से स्पर्श करायें।

मध्यमा ऊँगली और अनामिका ऊँगली के पोरों को,अंगूठों के पोरों से इस प्रकार मिलायें की तीनों एक साथ रहें।

अपनी कनिष्ठा ऊँगली को सीधा रखें।

इस तरह से हृदय मुद्रा का निर्माण होता है।

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Hriday Mudra कितनी देर तक करनी चाहिए

हृदय मुद्रा को कहीं भी और कभी भी किया जा सकता है। लेकिन जब वातावरण में प्राण वायु अधिक हो तब इसे करने से जयादा लाभ मिलता है।

शुरू में इसका अभ्यास 5-10 मिनट तक करें। जैसे जैसे अभ्यास में निपूर्णता होती जाए, 30 मिनटों तक हृदय मुद्रा का अभ्यास किया जा सकता है।

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Hriday Mudra में सजगता 

हृदय मुद्रा को करते समय आपकी सजगता शरीरिक रूप से वक्ष प्रदेश में श्वास पर होनी चाहिए।

आध्यात्मिक रूप से अनाहत चक्र पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए।

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हृदय मुद्रा के लाभ – Hridaya Mudra Benefits

इसको करने से हृदय की प्राण शक्ति में सुधार होता है।

ह्रदय मुद्रा प्राण के प्रवाह को हाथों से हृदय की ओर प्रवाहित करती है।

हृदय से जुडी नाड़ियों का सम्बन्ध मध्यमा ऊँगली और अनामिका से होता है।

अंगूठे प्राण परिपथ को पूरा कर, प्राण प्रवाह को हाथों से इन नाड़ियों में भेज कर शक्ति वर्द्धक का कार्य करते है।

हृदय मुद्रा हृदय रोग में काफी लाभदायदक होता है।

यह अवरुद्ध भावनाओं को मुक्त कर हृदय के बोझ को हल्का करती है।

हृदय मुद्रा भावनात्मक द्वन्द्व को दूर करता है।

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