Jalandhara Bandha कैसे करते है? जालन्धर बन्ध के लाभ

आज का लेख “Jalandhara Bandha कैसे करते है?” के बारे में है. इसे किसे करना चाहिए और किसे नहीं। जालन्धर बन्ध के लाभ और नुकासन क्या है? इसको करते समय क्या सावधानियाँ रखनी चाहिए? इन सब के बारे में विस्तार से जानेगे. तो चलिए शुरू करते है।

जालन्धर बन्ध क्या है? – What is Jalandhara Bandha in hindi?

योग परम्परा में जालन्धर बन्ध का उदगम तीन शब्दों से मिलकर बना है जिसका अर्थ है –

जाल – ग्रीवगत नाड़ियों का समूह

धर – ऊपर तरफ खिंचाव

बन्ध – बाँधना

शरीर से मस्तिष्क एवं मस्तिष्क से शरीर में जाने वाली नाड़ियों के ग्रीवा के पास के समूह को ऊपर खींचकर बाँध देना जालन्धर बन्ध कहलाता है. ऐसा मान्यता है कि इस जालन्धर बंध का अविष्कार जालंधरिपाद नाथ ने किया था, इसीलिए उनके नाम पर इसे जालंधर बंध कहा जाता हैं। Jalandhar Bandha का संबंध रूद्र ग्रंथि से होता है और रूद्र ग्रंथि का सीधा सम्बन्ध विशुद्धी चक्र से होता हैं। जालन्धर बन्ध से दिमाग, दिल और मेरुदंड (Spinal cord) की नाड़ियों में निरंतर रक्त संचार सुचारु रूप से संचालित होता रहता है।

जालन्धर बन्ध करने का तरीका – How to do Jalandhara Bandha in Hindi?

  • इसको करने के लिए सुखासन, वज्रासन, पद्मासन या सिद्धासन/सिद्धयोनि आसन जिसमे आप आराम से बैठ सके बैठ जाइए.
  • अपने सिर और मेरुदंड को सीधा रखें।
  • दोनों घुटने जमीन से सटे रहने चाहिए।
  • हथेलियों को घुटनों के ऊपर रखें।
  • अब आँखों को बन्द कर लें और पुरे शरीर को शिथिल करें.
  • धीमी और गहरी श्वास लेकर श्वास को अंदर रोके.
  • अब श्वास को अन्दर रोके रखते हुए सिर को सामने झुकायें और ठुड्डी से वक्ष को जोर से दबाये.
  • दोनों भुजाओं को सीधा करें और हाथों से घुटनों को दबाते हुए उन्हें इस स्थिति में दृढ़ता से जमाए रखें.
  • साथ ही कन्धों को ऊपर उठाकर सामने की ओर झुकाये.
  • इस तरह करने से भुजाएं अपने स्थान पर जमी रहेंगी और गर्दन पर पड़ने वाले दबाव में वृद्धि होगी.
  • जब तक श्वास को आरामपूर्वक रोकना सम्भव हो, तब तक अन्तिम स्थिति में रुके रहें.
  • अधिक जोर न लगायें।
  • अब दोनों कन्धों को शिथिल करे
  • भुजाओं को मोड़े धीरे धीरे बन्ध को ढीला करें.
  • सिर को ऊपर उठायें और तब श्वास छोड़ें।
  • यह एक चक्र हुआ. जब श्वास सामान्य हो जाए तब इस अभ्यास को पुनः दोहराये.
  • जो लोग जालन्धर बन्ध को बैठ कर नहीं कर सकते है, वे खड़े होकर भी इसे कर सकते है.

जालन्धर बन्ध प्रकारान्तर – Jalandhara Bandha Variation

इस Variation का उपयोग सामान्य रूप से आसनों के अभ्यासों के साथ किया जाता है. क्रिया योग में अधिक शुक्ष्म जालन्धर बन्ध का अभ्यास किया जाता है. इसमें सिर को आगे की ओर झुकाया जाता है, ताकि ठुड्डी छाती को दबाये, और सजगता को विशुद्धि चक्र पर रखा जाता है.

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जालन्धर बन्ध के दौरान श्वसन? – Breathing during Jalandhara Bandha in Hindi?

इसका अभ्यास अंतर्कुम्भक और बहिर्कुम्भक दोनों के साथ किया जा सकता है.

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जालन्धर बन्ध में कितने समय तक रहना चाहिए? – Jalandhar Bandha Duration in Hindi?

जितनी देर आरामपूर्वक आप श्वास को रोक सके, उतनी देर जालन्धर बन्ध का अभ्यास करना चाहिए. कुम्भक के समय गिनती करते हुए धीरे-धीरे एक एक गिनती बढ़ाकर कुम्भक की अवधि को बढ़ाना चाहिए. प्रारम्भ में इसका अभ्यास की पाँच बार किया जा सकता है.

जालन्धर बन्ध के दौरान सजगता – Awareness during Jalandhara Bandha in Hindi

शारीरिक रूप से आपकी सजगता कण्ठकूप (Throat Pit) पर होनी चाहिए. आध्यत्मिक रूप से विशुद्धि चक्र पर होना चाहिए।

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जालन्धर बन्ध का अभ्यास कब (क्रम ) करना चाहिए – Jalandhar Bandha Sequence in Hindi

Jalandhara Bandha का अभ्यास आदर्श रूप से प्राणायामों (Pranayama) और मुद्राओं (Mudra) के साथ किया जाता है. यदि आपको केवल बन्ध ही करना हो तो इसे ध्यान (Meditation) के पूर्व और आसन (Asana ) और प्राणायाम (Pranayama) के बाद इसे करना चाहिए.

जालन्धर बन्ध करने में क्या सावधानी बरती चाहिए – Contra-indications of Jalandhar Bandha in Hindi?

  • जालंधर बन्ध को खाली पेट करनी चाहिए।
  • जिन लोगों को सर्दी या जुकाम हुआ है। उन लोगों को जालंधर बन्ध का अभ्यास नहीं करना चाहिए।
  • सर्वाइकल स्पोंडिलाइटिस से ग्रसित व्यक्ति को Jalandhar Bandha का अभ्यास नहीं करना चाहिए।
  • हृदय रोग से पीड़ित व्यक्तियों को जालन्धर बन्ध का अभ्यास नहीं करना चाहिए।
  • यदि आप को पीठ की समस्या है, तो जालंधर बन्ध को न करें।
  • हाई ब्लड प्रेशर पीड़ित व्यक्तियों को यह अभ्यास नहीं करना चाहिए।
  • स्तनपान कराने वाली महिलाओं को किसी योग विशेषज्ञ से सलाह लेने के बाद ही Jalandhar Bandha का अभ्यास करनी चाहिए।
  • Jalandhar Bandha का अभ्यास लम्बे समय तक नहीं करना चाहिए क्योकि पर लंबे समय तक कुंभक करने से हृदय पर जोर पड़ता है। जालंधर बंध प्रारंभ में रक्तचाप को घटाता है।
  • जब तक गर्दन के बन्ध और भुजाओं के बन्ध को हटा न दिया जाए और सिर पूरी तरह से सीधा ना हो जाए। तबतक श्वास नहीं छोड़े.
  • यदि थोड़ा भी घुटन महसूस हो तो तुरंत अभ्यास को बंद कर देना चाहिए और विश्राम करना चाहिए ।
  • जब घुटन की संवेदना समाप्त हो जाए तब अभ्यास पुनः शुरू करना चाहिए।

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जालन्धर बन्ध के लाभ – Benefits of Jalandhara Bandha in Hindi

  • जालंधर बन्ध रक्त परिसंचरण तन्त्र के कार्यों को नियमित करने में सहायक हैं।
  • जालन्धर बन्ध कैरोटिड साइनस को दबाता है. जो गर्दन की मुख्य धमनियों, कैरोटिड धमनियों पर स्थित है. ये साइनस रक्त परिसंचरण और श्वसन संस्थान कार्यों को नियमित बनाने में सहायक होते है.
  • यह स्वसन संस्थान के कार्यों को नियमित बनाने में सहायक हैं।
  • सामान्य रूप से शरीर में ऑक्सीजन की कमी और कार्बन डाइऑक्साइड की अधिकता होने से हृदय गति बढ़ती है और स्वास बोझिल हो जाती है इससे साइनस पर कृत्रिम दबाव डालकर इस प्रवृत्ति को रोका जाता है। जिससे हृदय गति मंद होती है ।
  • Jalandhar Bandha लगाने से स्वास रोकने की क्षमता बढ़ती है।
  • इसको करनें से मानसिक विश्राम प्राप्त होता है।
  • जालन्धर बन्ध करनें से तनाव चिंता और क्रोध में कमी आती और एकाग्रता का विकास होता है।
  • यह थायराइड ग्रंथि के कार्य को संतुलित करता हैं।
  • जालन्धर बन्ध मेटाबोलिज्म की क्रिया को नियमित बनाने में सहायक होता है।
  • इसके अभ्यास से प्राण वायु का संचरण सही तरीके के साथ होता है।
  • Jalandhar Bandha नियमित रूप से करने से रीढ़ की हड्डियों में खिचाव पैदा होता है और रक्त संचार तेजी से होने लगता है।
  • इसे करने से गर्दन की मांसपेशियों में रक्त संचार सही ढंग से होने लगता है ।
  • जालंधर बंध शरीर की धमनियों को स्वस्थ बनाकर रखने का अद्भुत विकल्प है ।

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