Agnisar Kriya Pranayama कैसे करते है?

अग्निसार क्रिया (Agnisar Kriya Pranayama) कैसे करते है. आज के आर्टिकल में हम विस्तार से जानने वाले है. दोस्तों अगर आप भी अपने पाचन अग्नि को सक्रिय करना चाहते है. या अग्निसार क्रिया का पूण लाभ लेना चाहते है. तो यह पोस्ट आपके लिए ही है. तो चलिए शुरू करते है.

अग्निसार क्रिया क्या है? (Agnisar Kriya Pranayama in Hindi)

अग्निसार क्रिया को वह्निसार क्रिया भी कहा जाता है. Agni और Vahni दोनों का अर्थ अग्नि (Fire) होता है. वहीं सार का मतलब मूलतत्व होता है. यही मूलतत्व (अग्निसार) ही हमारे पाचन क्रिया के लिए जिम्मेदार होते है.

यदि पाचन अग्नि मन्द पड़ जाती है. तो अग्निसार क्रिया ही उसे पुनः प्रज्वलित करें में सहायता करती है. यह पाचन तंत्र (Digestive System) और उससे सम्बद्ध अंगों को शुद्ध करने का कार्य करती है.अग्निसार क्रिया अंगों को भोजन से अधिकतम पोषक तत्व ग्रहण करने की क्षमता प्रदान करती है.

अग्निसार क्रिया प्रारम्भिक अभ्यास (Agnisar Kriya Steps in Hindi)

प्रारम्भिक अभ्यास को श्वान प्राणायाम Swana Pranayama (Panting Breath) भी कहा जाता है.

सबसे पहले वज्रासन में बैठ जाइए.

अब दोनों घुटनों के बीच जितना सम्भव हो सके उतना दुरी बना ले.

बस आपको ध्यान यह रखना है. दोनों पैरो के अंगूठो को एक साथ रखना है.

दोनों हाथों को घुटनों पर रख कर आँखें बंद कर लें. इसी अवस्था में कुछ देर तक पुरे शरीर को शिथिल करें.

अब दोनों हाथों को सीधा करते हुए. थोड़ा सा आगे की ओर झुक जाइए और सिर को सीधा कर लीजिए.

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पूरा मुँह को खोलकर जीभ को बाहर निकाल लीजिये.

मुँह से अब जल्दी-जल्दी श्वास लीजिये और छोड़िये.

श्वास लेते समय आपका उदर फैलना और छोड़ते समय सिकुड़ना चाहिए. इस तरह का ताल-मेल बैठना है.

श्वसन क्रिया कुत्ते के हाफने के समान होनी चाहिए. इसमें कोई जोर जबरजस्ती नहीं करनी चाहिए.

अपने वक्ष को निश्चल रखना है.जो भी movement होगी वह उदर में होगी.

एक चक्र में 10-20 बार श्वास ले और छोड़ सकते है. अब विश्राम की स्थिति में आ जाइए और दूसरा चक्र तभी करें जब आपका श्वसन सामान्य हो जाये.

अग्निसार क्रिया या वह्निसार धौति (Agnisara Kriya or Vahnisara Dhauti Steps in Hindi)

इसको आप वज्रासन, भद्रासन या पद्मासन में कर सकते है.

अग्निसार के प्रारम्भिक अभ्यास की तरह बैठ जाइए.

एक लंबी गहरी श्वास लीजिये और श्वास को छोड़ते हुए. फेफड़ो को जितना हो सके खली कर लीजिये.

दोनों हाथों की कोहनियों को सीधा करते हुए थोड़ा आगे की ओर झुक जाइए. अब घुटनो को नीचे दबाकर जालन्धर बन्ध को लगा लीजिये.

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जितनी देर श्वास को आप बाहर आराम से रोक सकते है. उतनी देर उदर की पेशियों को शीघ्रता से सिकोड़िए और फैलाइये.

इस पूरी क्रिया में कोई जोर जबरजस्ती नहीं करनी है.

अब सबसे पहले जालन्धर बन्ध को हटाना है.

फिर सिर को सीधा कर धीमी और गहरी श्वास अन्दर लेना है.

इस तरह एक चक्र पूरा होता है.

अब विश्राम की स्थिति में आ जाइए और दूसरा चक्र तभी करें जब आपका श्वसन सामान्य हो जाये.

अग्निसार क्रिया करने की अवधि (Agnisar Kriya Duration in Hindi)

Agnisar Kriya को प्रारम्भ में 10 बार उदर को सिकोड़ते और फैलते हुए 3 चक्र तक का अभ्यास कर सकते है. जैसे जैसे आपका अभ्यास बढ़ता जाये. प्रत्येक चक्र में 100 बार तक उदर को सिकोड़ और फैला सकते है.

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अग्निसार क्रिया करते समय सजगता (Awareness During Agnisar Kriya in Hindi)

आपकी सजगता उदर और श्वास की गति के तालमेल पर होनी चाहिए. साथ में अपना ध्यान मणिपुर चक्र पर केंद्रित रखना है.

अग्निसार क्रिया करने का क्रम ( Agnisar Kriya Sequence In Hindi)

Aganisar Kriya को खाली पेट आसन और प्राणायाम के बाद करना चाहिए. शौच के बाद प्रातः काल करना ज्यादा फायदेमंद होता है.

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अग्निसार क्रिया में सावधानियाँ (Precautions in Agnisar in Hindi)

Agnisar Kriya प्रणायाम को ग्रीष्म काल में सावधानी पूर्वक करनी चाहिए. इसको करने से शरीर का तापमान और रक्तचाप बहुत तेजी से बढ़ सकता है.

इसीलिए ग्रीष्म काल में जब भी अग्निसार क्रिया करे. तो शीतली और शीतकारी जैसे शीतलता प्रदान करने वाले प्राणायाम जरूर करें.

अग्निसार क्रिया की सीमायें (Agnisar Contra-indications in Hindi)

अग्निसार क्रिया प्रणायाम उन्हें नहीं करनी चाहिए जिन्हे-

  • उच्च रक्तचाप की समस्या हो
  • ह्रदय रोग हो
  • पेप्टिक अल्सर से ग्रसित हो
  • थायरॉइड की अधिक सक्रियता हो
  • जीर्ण अतिसार हो
  • 3 महीने से अधिक की गर्भवती महिला को

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अग्निसार क्रिया के फायदे व लाभ (Benefits of Agnisar Kriya in Hindi)

Agnisar Kriya Pranayama उदर की पेशियों एवं मध्यपट को मजबूत बनता है. अगर आप उदर की पेसियों पर नियंत्रण चाहते है. तो यह सबसे उत्तम क्रिया है.

उड्डियान बन्ध और नौली क्रिया करने से पहले इसे करने से काफी फायदा होता है.अग्निसार क्रिया के फायदे व लाभ निम्न है-

  • अग्निसार क्रिया भूख को बढ़ाती है.
  • पाचन सम्बन्धी रोगों जैसे- (अपच, उदर-वायु, अति अम्लता, अल्प अम्लता, कब्ज और जिगर एवं गुर्दे की मंदता) को दूर करती है.
  • यह उदर की मालिश करती है तथा सम्बन्धित स्नायुओं को उत्प्ररित करती है.
  • उदर के अंगों को पूर्ण स्वस्थ बनती है.
  • अग्निसार क्रिया आलस्य, उदासी, और सुस्ती को दूर करती है.
  • यह पंच प्राणों को उत्प्रेरित करती है. विशेषकर समान को.
  • अग्निसार क्रिया शरीर में ऊर्जा के स्तर को बढ़ाती है.
  • यह डायबिटीज के रोगियों के लिए काफी फायदेमंद क्रिया है.

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