Prana Mudra कैसे करते है? | प्राण मुद्रा के लाभ

दोस्तों आज का लेख प्राण मुद्रा (Prana Mudra) के बारे में है। इस लेख में आप जान पायेंगे कि प्राण मुद्रा करने की विधि एवं लाभ क्या है? इस मुद्रा को करते समय क्या सजगता बरतनी चाहिए आदि। तो चलिए शुरू करते है –

प्राण मुद्रा – Prana Mudra in Hindi

यह मुद्रा सुप्त प्राण शक्ति को जाग्रत करने का सबसे अच्छा उपाय है। प्राण मुद्रा को शांति मुद्रा भी कहा जाता है। इस मुद्रा को ठीक से करने के लिए आपको भैरव मुद्रा, मूलबन्ध, पद्मासन, सिद्धासन या सिद्धयोनि आसन का ज्ञान जरूरी है। तभी आप प्राण मुद्रा का पूर्ण लाभ ले सकते है।

प्राण मुद्रा करने की विधि – How to Do Prana Mudra in Hindi

  • सबसे पहले ध्यान के किसी आरामदायक आसन में बैठ जाइये।
  • प्राण मुद्रा का अधिकतम लाभ लेने हेतु पद्मासन, सिद्धासन या सिद्धयोनि आसन में भी बैठ सकते है।
  • अब दोनों हाथों को भैरव मुद्रा में रख लें।
  • अपनी आखों को बंद रखते हुए पुरे शरीरी को, मुख्यतः उदर, भुजाओं और हाथों को विश्राम दे।

प्राण मुद्रा चरण 1 – Prana Mudra Stage 1 in Hindi

 

Prana Mudra

 

  • अपनी आखों को बन्द रखते हुए श्वास को अंदर ले।
  • अब फेफड़ों से अधिक से अधिक वायु को बाहर निकालें।
  • इसके लिए उदर की पेशियों को संकुचित करते हुए गहरी से गहरी श्वास को बाहर छोड़े।
  • अब श्वास को बाहर ही रोक ले और मूलाधार में स्थित मूलाधार चक्र पर एकाग्रता रखते हुए मूलबन्ध को लगा ले।
  • आप जितनी देर तक आराम से हो सके, श्वास को बाहर रोक कर रखें।

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प्राण मुद्रा चरण 2 – Prana Mudra Stage 2 in Hindi

 

Prana Mudra

 

  • अब सबसे पहले मूलबन्ध को शिथिल करें।
  • फेफड़ों में अधिक से अधिक वायु का प्रवेश कराने के लिए उदर को पूरी तरह फैलाकर धीरे-धीरे गहरी श्वास अंदर ले।
  • इसी के साथ साथ हाथों को नाभि तक ऊपर उठायें।
  • आपके हाथ खुले रहेंगे, उँगलियाँ एक दूसरे की ओर होगीं, लेकिन एक दूसरे को स्पर्श नहीं करेंगी।
  • अपने हथेलियों को धड़ की ओर रखे जैसा की चित्र में दिख रहा है।
  • हाथों की गति का तालमेल उदर श्वसन के साथ होना चाहिए।
  • अपनी भुजाओं और हाथों को तनावरहित रखें।
  • जब भी उदर से श्वास ले यह अनुभव करने का प्रयास करें कि प्राण शक्ति मेरुदण्ड में मूलाधार चक्र से मणिपुर चक्र की ओर ऊपर जा रही है।

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प्राण मुद्रा चरण 3 – Prana Mudra Stage 3 in Hindi

 

प्राण मुद्रा

 

  • वक्ष को फैलायें और हाथों को ऊपर उठाकर हृदय केंद्र के ठीक सामने लाने तक श्वास अंदर लेते रहे।
  • श्वास को लेते समय यह अनुभव करने का प्रयास करे कि प्राण शक्ति मणिपुर से अनाहत की ओर खींच रही है।

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प्राण मुद्रा चरण 4 – Prana Mudra Stage 4 in Hindi

 

प्राण मुद्रा

 

  • अब अपने कन्धों को थोड़ा ऊपर उठाकर फेफड़ों में और अधिक वायु भर ले।
  • वायु को भरते समय यह अनुभव करें कि प्राण विशुद्धि चक्र तक ऊपर जा रहा है।
  • श्वास के साथ साथ हाथों को भी गले के सामने तक ऊपर उठा ले।

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प्राण मुद्रा चरण 5 – Prana Mudra Stage 5 in Hindi

 

Prana Mudra

 

  • अब भुजाओं को बगल में फैलाते समय श्वास को भीतर रोकें।
  • अंतिम स्थिति में हाथ कानों की सीध में रहेंगे।
  • भुजायें बगल में फैली रहेंगी। लेकिन पूरी तरह तनी हुई नहीं रहेंगी।
  • आपकी हथेलियाँ ऊपर की ओर रहेंगीं।
  • यह अनुभव करें कि प्राण एक तरंग के समान प्रसारित होते हुए आज्ञा, बिंदु और सहस्त्रार में पहुँच रहा है।
  • अब सहस्त्रार पर अपना ध्यान केंद्रित करें और सिर से निकलते हुए शुद्ध प्रभामण्डल को मानसिक रूप से देखने का प्रयास करें।
  • यह अनुभव करें कि सम्पूर्ण व्यक्तित्व समस्त प्राणियों के लिए शांति की तरंगे बिखेर रहा है।
  • अपने फेफड़ों पर बिना किसी प्रकार का जोर डाले जितनी देर तक इस अवस्था में रहना सम्भव हो सके रुके।
  • प्राण मुद्रा चरण 4, 3, 2, 1 की पुनरावृति करें और श्वास छोड़ते हुए धीरे धीरे प्रारम्भिक स्थिति में वापस आ जायें।
  • श्वास को छोड़ते समय ऐसा अनुभव करें की प्राण क्रमश प्रत्येक चक्र से होते हुए अवरोहण कर मूलाधार तक पहुँच रहा है।
  • रेचक के अंत में मूलबन्ध लगायें और मूलाधार पर एकाग्रता रखें।
  • फिर पुरे शरीर को शिथिल करे और सामान्य श्वसन करें।
  • अब इस अभ्यास में दक्षता प्राप्त हो जाएँ तब मानसिक रूप से श्वास को शुषुम्ना नाड़ी में श्वेत प्रकाश की धारा की तरह आरोहण-अवरोहण करते देखें।
  • अभ्यास के अन्त में प्राण को मूलाधार में लौटाना न भूलें।

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प्राण मुद्रा करते समय श्वसन – Breathing

इस मुद्रा में श्वास, प्रश्वास और कुम्भक की अवधि को धीरे धीरे बढ़ाना चाहिए।
हमेस इस बात का ध्यान रखें कि फेफड़ों पर अधिक जोर न पड़े।

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प्राण मुद्रा करते समय सजगता – Awareness in Prana Mudra in Hindi

श्वास और हाथों को ऊपर उठाने एवं नीचे लाने की गति के साथ जोड़कर सजगता को मूलाधार से सहस्त्रार और फिर सहस्त्रार से मुलाधार तक एक अविरल, सतत प्रवाह के रूप में गतिमान करें।

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प्राण मुद्रा करने का क्रम – Sequence

इस मुद्रा का अभ्यास कभी भी किसी भी समय किया जा सकता है।
लेकिन आसन और प्राणायाम के बाद और ध्यान के पूर्व प्राण मुद्रा का अभ्यास करना सर्वोत्तम होता है।

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प्राण मुद्रा अभ्यास का समय – Time of practice

इस प्राण मुद्रा को करने का सबसे उत्तम समय सूर्योदय का समय है। सूर्योदय (Sunrise) के समय उगते हुए सूर्य के सामने प्राण मुद्रा का अभ्यास उत्तम होता है।

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प्राण मुद्रा के लाभ – Health Benefits of Prana Mudra in Hindi

  • यह प्राण मुद्रा सुप्त प्राण शक्ति को जाग्रत करती है।
  • प्राण मुद्रा सम्पूर्ण शरीर में प्राण शक्ति को वितरित करती है।
  • इस मुद्रा को करने से शरीरिक बल, स्वास्थ्य एवं आत्म विश्वास बढ़ता है।
  • प्राण मुद्रा प्राणिक शरीर, नाड़ियों और चक्रों तथा शरीर में सूक्ष्म प्राण प्रवाह के प्रति सजगता का विकास करती है।
  • यह मुद्रा अनन्त स्रोत्र से ऊर्जा के आदान प्रदान की बाह्य मनोवृति धारण कर आंतरिक शांति एवं सम भाव लाती है।
  • प्राण मुद्रा श्वसन को प्रोत्साहित कर प्राण को ऊर्ध्वमुखी बनती है।

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