Uddiyana Bandha कैसे करते है? उड्डियान बन्ध के फायदे।

आज का लेख “Uddiyana Bandha कैसे करते है?” के बारे में है. इसे किसे करना चाहिए और किसे नहीं। उड्डियान बन्ध के लाभ और नुकासन क्या है? इसको करते समय क्या सावधानियाँ रखनी चाहिए? इन सब के बारे में विस्तार से जानेगे. तो चलिए शुरू करते है।

उड्डियान बन्ध क्या है? – What is Uddiyana Bandha in Hindi?

उड्डियान शब्द का अर्थ होता है – ऊपर उठाना या उड़ाना. इसमें हम मध्य पेट और उदर को वक्ष की तरफ ऊपर खींचते है तथा यह प्राण के उर्ध्वगामी उड़ान में सहायक होता है. इसिलए इसका नाम उड्डियान बन्ध पड़ा.

नाभि के उदर को पीठ की ओर सिकोड़े जिसके परिणामस्वरूप प्राण ऊपर उठता है. इसे Uddiyan Bandha कहते है.

Uddiyana Bandha कैसे करते है? – How to do Uddiyana Bandha in hindi?

इसको करने की विधि इस प्रकार है –

उड्डियान बन्ध प्रारंभिक अभ्यास – Uddiyan Bandha Preparatory practice

 

uddiyan bandha

  • सीधे खड़े हो जाइए।
  • अब दोनों पंजों के बीच लगभग आधे मीटर की दुरी रखें।
  • नाशिकाछिद्रों से गहरी श्वास ले.
  • अब कमर से आगे की ओर झुक कर पूरी श्वास को मुख से बाहर निकाल दे.
  • जितना हो सके फेफड़ों को अधिक से अधिक खाली करनें का प्रयास करें।
  • अपने मेरुदण्ड को सीधा रखें और घुटनों को थोड़ा मोड़ ले.
  • हथेलियों को घुटनों के ठीक ऊपर जांघों पर इस प्रकार रखें की शरीर के ऊपरी भाग का भार घुटनों पर पड़े.
  • हाथ के उँगलियों को नीचे की ओर या एक दूसरे की ओर कर के रखें।
  • आपकी दोनों भुजायें सीधी होनी चाहिए.
  • इस तरह करने से उदर का संकुचन अपने आप हो जाता है.
  • अपने सिर को आगे की ओर झुकायें, किन्तु ध्यान रहे ठुड्डी वक्ष से स्पर्श न करे.
  • अब श्वास द्वार बन्द रखते हुए वक्ष को फैलाकर श्वास लेने का अभिनय करें। मानो आप सचमुच में श्वास ले रहे हो, पर श्वास को अंदर नहीं लेना है.
  • पैर को थोड़ा सीधा करें। इस गति से उदर सहज ही ऊपरऔर मेरुदण्ड की ओर भीतर खींचेगा।
  • इस तरह अब उड्डियान बन्ध लग जाता है.
  • उड्डियान बन्ध लगने के बाद जितनी देर तक आराम से रह सकते है उतनी देर बिना जोर लगाए बने रहना चाहिए.
  • अब Uddiyan Bandha को खोल ले और वक्ष को शिथिल करें।
  • घुटनों को सीधा कर ले और सिर को ऊपर उठायें।
  • फेफड़ों के बन्ध को ढीला करने के लिए पहले थोड़ी श्वास छोड़े फिर नाक से धीरे धीरे श्वास ले.
  • श्वसन सामान्य होने तक खड़े रहें।
  • अब अगला चक्र करें।

उड्डियान बन्ध – Uddiyan Bandha (Abdominal contraction)

 

uddiyana bandha

  • सबसे पहले सिद्धासन/सिद्धयोनि आसान या पद्मासन में बैठ जायें।
  • अपने मेरुदण्ड को सीधा रखें और घुटनों को जमीन के संपर्क में रखें.
  • नितम्बों को ऊंचा करने के लिए एक तकिये का उपयोग कर सकते है. जिससे घुटने नीचे की ओर रहेंगे।
  • हथेलियों को घुटनों पर बिना मोड़ें रखें.
  • अब आँखों को बन्द कर लें और सम्पूर्ण शरीर को शिथिल करें.
  • नाशिकाछिद्रों से गहरी श्वास ले.
  • हुश की ध्वनि के साथ मुख-मार्ग से श्वास बाहर करें और फेफड़ो को जितना सम्भव हो खाली करने का प्रयास करें।
  • श्वास बाहर रोकें।
  • आगे की ओर झुकें और हथेलियों से घटनों पर दबाव डालें।
  • कोहनियों को सीधा करें और कंधों को ऊपर उठायें। ऐसा करने से मेरुदण्ड का और अधिक विस्तार होगा।
  • अब ठुड्डी से वक्ष को दबाते हुए जालन्धर बन्ध लगायें।
  • उदर की पेशियों को भीतर और ऊपर की ओर संकुचित करें.
  • बिना जोर लगाए श्वास को बाहर रोककर Uddiyan Bandha लगाये।
  • इसमें जितनी देर रुक सकते है रुकें।
  • अब Uddiyan Bandha खोल दें, कोहनियों को मोड़े और कन्धों को नीचे करें।
  • सिर को ऊपर उठायें और फिर धीरे धीरे से श्वास ले.
  • जब तक श्वास प्रश्वास सामान्य न हो जाय, तब तक इसी स्थिति में रुकें।
  • फिर अगला चक्र करें.

उड्डियान बन्ध के दौरान श्वसन? – Breathing during Uddiyana Bandha in Hindi?

उड्डियान बन्ध का अभ्यास केवल बहिर्कुम्भक साथ किया जाता है. अर्थात श्वास को बाहर को रोककर इसका अभ्यास करना चाहिए.

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उड्डियान बन्ध में कितने समय तक रहना चाहिए? – Uddiyan Bandha Duration in Hindi?

जितनी देर आरामपूर्वक आप श्वास को रोक सके, उतनी देर Uddiyan Bandha का अभ्यास करना चाहिए. बहिर्कुम्भक के समय गिनती करते हुए धीरे-धीरे एक एक गिनती बढ़ाकर कुम्भक की अवधि को बढ़ाना चाहिए. प्रारम्भ में इसका 3 चक्र का अभ्यास करें। जैसे जैसे अभ्यास होता जाये इसको 10 बार तक किया जा सकता है.

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उड्डियान बन्ध के दौरान सजगता – Awareness during Uddiyan Bandha in Hindi

आपकी सजगता शारीरिक रूप से श्वास के ताल मेल पर और उदर के ऊपर होना चाहिए।आध्यात्मिक रूप से मणिपुर चक्र पर होना चाहिए.

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उड्डियान बन्ध का क्रम – Uddiyan Bandha Sequence in Hindi

इसका अभ्यास आसन (Asana) और प्राणायाम (Pranayama) के बाद और ध्यान (Meditation) से पहले किया जाना चाहिए। उड्डियान बन्ध आदर्श रूप से मुद्रा (Mudra) बंध (Bandha) और प्राणायाम (Pranayama) के संयोजन के साथ किया जाता है. इससे इसका प्रभाव काफी बढ़ जाता है. सिर के बल किये जाने वाले आसन जैसे शीर्षासन आदि को कर लेने के बाद उड्डियान बन्ध करना काफी आसन हो जाता है.

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उड्डियान बन्ध में सावधानियाँ – Precaution in Uddiyana Bandha in Hindi?

यह बन्ध की एक उच्च विधि है. इसलिए कुम्भक, जालन्धर बन्ध और मूलबन्ध में दक्षता प्राप्त हो जाने के बाद ही इसको करना चाहिए. इसका अभ्यास कुशल मार्गदर्शन में ही करना चाहिए.

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उड्डियान बन्ध की सीमायें – Contra-indications of Uddiyana Bandha in Hindi?

इसमें निम्नांकित तथ्यों का ध्यान रखना आवश्यक है –

  • इसका अभ्यास हमेशा खाली पेट ही करना चाहिए।
  • हृदय रोग, पेप्टिक अल्सर, कोलाइटिस से पीड़ित व्यक्ति को उड्डियान बन्ध का अभ्यास नहीं करना चाहिए.
  • हर्निया के रोगी को भी इसे नहीं करना चाहिए।
  • गर्भवती महिलाओं को इसका अभ्यास नहीं करना चाहिए.
  • कम उम्र के बच्चों को उड्डियान बन्ध का अभ्यास नहीं करना चाहिए.
  • उच्च रक्तचाप (High blood pressure), ग्लूकोमा और बढ़े हुए अन्तः कपालीय दबाव से पीड़ित व्यक्तियों को Uddiyan Bandha का अभ्यास नहीं करना चाहिए.

उड्डियान बन्ध के लाभ – Benefits of Uddiyana Bandha in Hindi

इसके अभ्यास के निम्नलिखित लाभ होते है-

  • उड्डियान बन्ध उदर एवं आमाशय के रोग जैसे, कब्ज, अपच और कृमिरोग में लाभ पहुँचता है.
  • यह मधुमेह के उपचार की रामबाण दवा है।
  • Uddiyan Bandha के अभ्यास से जठराग्नि प्रदीप्त होती है।
  • यह उदर के सभी अंगों की मालिश करता है.
  • इसके अभ्यास से एड्रिनल ग्रंथियाँ संतुलित होती है. तनाव और चिन्ता में कमी आती है और सुस्ती मिटती है.
  • इससे पुरे धड़ में रक्त संचरण में सुधार होता है.
  • यह मणिपुर चक्र को उद्दीप्त करता है.

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