Ayurvedic Treatment For Fever | बुखार का आयुर्वेदिक इलाज

दोस्तों बुखार बच्चे, वयस्कों किसी को भी हो सकता है। यह मुख्यतः शारीरिक तापमान से जुड़ी समस्या है।
एक वयस्क के लिए सामान्य शरीर का तापमान लगभग 98.6 ° F (37 ° C) होता है। और यह लगातार थोड़ा अधिक या कम होता रहता है। लेकिन जब शरीर का तापमान 98.6 ° F (37 ° C) से ज्यादा बढ़ने लगे तो यह बुखार की श्रेणी में आता है। शरीर का तापमान बढ़ने के साथ-साथ सर्दी-जुकाम, खांसी और शारीरिक दर्द जैसी परेशानी भी होने लगती है। आज इस आर्टिकल में बुखार का आयुर्वेदिक इलाज क्या है? (Ayurvedic Treatment For Fever) के बारे में विस्तार से बताने जा रहे है। तो चलिए लेख शुरू करते है:

बुखार का आयुर्वेदिक इलाज को जानने से पहले। शरीर का सामान्य तापमान रेंज क्या है? और बुखार के लक्षणों को समझना बेहद जरूरी है। तो चलिए सबसे पहले इनको जानते है।

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शरीर का सामान्य तापमान रेंज क्या है? (What is a normal body temperature range?)

नीचे दिए गए चार्ट के अनुसार वयस्कों और बच्चों के लिए शरीर के तापमान की सामान्य सीमा निम्न प्रकार है:

Type of reading 0–2 years 3–10 years 11–65 years Over 65 years
Oral 95.9–99.5°F (35.5–37.5°C) 95.9–99.5°F (35.5–37.5°C) 97.6–99.6°F (36.4–37.6°C) 96.4–98.5°F (35.8–36.9°C)
Rectal 97.9–100.4°F (36.6–38°C) 97.9–100.4°F (36.6–38°C) 98.6–100.6°F (37.0–38.1°C) 97.1–99.2°F (36.2–37.3°C)
Armpit 94.5–99.1°F (34.7–37.3°C) 96.6–98.0°F (35.9–36.7°C) 95.3–98.4°F (35.2–36.9°C) 96.0–97.4°F (35.6–36.3°C)
Ear 97.5–100.4°F (36.4–38°C) 97.0–100.0°F (36.1–37.8°C) 96.6–99.7°F (35.9–37.6°C) 96.4–99.5°F (35.8–37.5°C)

बुखार के लक्षण क्या हैं? (Symptoms of a Fever)

बुखार के लक्षण निम्नलिखित हो सकते हैं। जैसे:

  • भूख न लगना
  • ठंड लगना
  • सरदर्द
  • चिड़चिड़ापन
  • मांसपेशी में दर्द
  • कंपकंपी
  • पसीना आना
  • दुर्बलता
  • अत्यधिक थकान महसूस होना
  • शरीर का तापमान सामान्य से ज्यादा बढ़ना
  • खांसी होना
  • जोड़ो में दर्द की परेशानी शुरू होना
  • दस्त होना
  • त्वचा पर रैशेज होना
  • सर्दी-जुकाम होना
  • गले में दर्द की परेशानी होना
  • बुखार होने पर आंखें लाल होना और जलन होना
  • उल्टी और दस्त दोनों का साथ-साथ होना

ऊपर बताये गए लक्षणों में से अगर कुच्छ भी लक्षण दिखाई दे तो डॉक्टर से संपर्क जरूर करना चाहिए।

बुखार का कारण क्या है? (What is the cause of fever?)

बुखार आने के कारण निम्नलिखित हो सकते हैं। जैसे:-

  • अध् पक्के हुए अनाज का सेवन करना
  • दूषित पानी या खाद्य पदार्थों का सेवन करना
  • शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होना
  • फीवर से ग्रसित व्यक्ति के संपर्क में आना

डॉक्टर द्वारा ये चार कारण अहम मानें जाते है। और इन कारणों के अलावा बुखार के अन्य कारण भी हो सकते हैं। इसलिए संक्रमण से बचकर रहना है।

बुखार का आयुर्वेदिक इलाज कैसे किया जाता है? (Ayurvedic Treatment For Fever)

बुखार का आयुर्वेदिक इलाज निम्नलिखित तरह से किया जाता है:-

बुखार का आयुर्वेदिक इलाज गुडूची से (Ayurvedic treatment of fever with Guduchi)

आयुर्वेद में गुडूची (Guduchi) एक बहुत ही लाभकारीऔषधि है।इस औषधि में कई शक्तिशाली गुण मौजूद होते है। आयुर्वेद विशेषज्ञ बुखार होने पर गुडूची को औषधि की तरह सेवन करने की सलाह देते हैं। गुडूची इम्यून सिस्टम को स्ट्रॉन्ग करने में अत्यधिक मददगार होता है। यह उल्टी, दस्त, सर्दी-जुकाम या खांसी की परेशानी में भी काफी फायदेमंद होता है।

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बुखार का आयुर्वेदिक इलाज पिप्पली से (Ayurvedic treatment of fever from Long pepper)

फीवर में पिप्पली का सेवन काफी लाभकारी होता है। पिप्पली में कई प्रकार के रासायनिक संगठन मौजूद होते हैं जैसे पिपरिन, स्टेरॉइड्स (Steroid), ग्लूकोसाइड्स, पिपलार्टिन एवं पाईपरलोगुमिनिन।औषधि गुणों से भरपूर होने की वजह से पिप्पली को आयुर्वेदिक इलाज के विकल्प में अपनाया जाता है। पिप्पली लिवर से संबंधित बीमारियों से भी पीड़ित व्यक्तियों के लिए एक उत्तम आयुर्वेदिक औषधि है।

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बुखार का आयुर्वेदिक इलाज वासा से (Ayurvedic treatment of fever from Adoosa)

अडूसा (वासा) एक श्रेष्ठ औषधीय पौधों है। बुखार होने पर वासा का सेवन करने से काफी लाभ मिलता है। अडूसा में फायटोकेमिकल्स मौजूद होते हैं। वासा एक ऐसा औषधीय पौधा है जिसका औषधि के रूप में पंचाँग इस्तेमाल होता है। जैसे पत्तियों, फूल एवं जड़ आदि। इसका स्वाद कड़वा होता है। यह बुखार के साथ-साथ वासा खांसी,शारीरिक दर्द, नर्वस सिस्टम से संबंधित परेशानी, डायजेशन की समस्या, डायबिटीज की परेशानी, बार-बार पेशाब जाने की समस्या और सांस संबंधी परेशानियों को भी दूर करने में सक्षम है। अडूसा (वासा) वात पित और कफ तीनो प्रकार के विकारों में लाभकारी औषधि है।

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बुखार का आयुर्वेदिक इलाज आमलकी से (Ayurvedic treatment of fever with Amalaki)

आमलकी को आंवला (Gooseberry) के नाम से भी जाना जाता है। आयुर्वेद में आमलकी एक श्रेष्ठ गुणों वाली औषधि है। यह विटामिन सी का एक उच्च सोर्स है। आमलकी में विटामिन-सी (Vitamin C), विटामिन-बी 5, विटामिन-बी 6 और फायबर प्रचुर मात्रा में होता हैं। बुखार होने पर आमलकी का सेवन एक श्रेष्ठ औषधि के रूप में काम करती है।

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बुखार का आयुर्वेदिक इलाज गिलोय से (Ayurvedic treatment of fever with giloy)

गिलोय एक शक्तिशाली इम्युनोमोड्यूलेटर है, जो इम्यून सिस्टम को शक्तिशाली बनाये रखने में मदद करता है।
गिलोय की पत्त‍ियों में प्रोटीन, कैल्शि‍यम, फॉस्फोरस जैसे कई पोषक तत्व मौजूद होते हैं। गिलोय में एंटी-लेप्रोटिक और मलेरिया-रोधी गुण मौजूद होते हैं। इसलिए गिलोय का सेवन वायरल फीवर होने पर भी किया जाता है। इसके तनों में स्टार्च की भी अच्छी मात्रा होती है। यह सर्दी-जुकाम जैसी परेशानियों से भी राहत दिलाने में काफी मददगार होता है।

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बुखार का आयुर्वेदिक इलाज दालचीनी से (Ayurvedic treatment of fever with cinnamon)

आयुर्वेद के अनुसार दालचीनी बुखार में काफी फायदेमंद होता है। इसके आलावा संक्रामक खांसी, गले में दर्द की समस्या या जुकाम जैसी शारीरिक परेशानी को दूर करने के लिए इसका सेवन काफी लाभकारी होता है। दालचीनी से बना कड़ा पिने से बुखार में काफी आराम मिलता है।

बुखार का आयुर्वेदिक इलाज तुलसी से (Ayurvedic treatment of fever with Tulsi)

शरीर के रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने में अहम रोल निभाती है तुलसी। तुलसी में विटामिन-ए, विटामिन-के, कैल्शियम, आयरन और मैगनीज जैसे अन्य खनिज तत्व मौजूद होते हैं। बुखार होने पर तुसली का सेवन करने से तुरंत लाभ होता है। शरीर के तापमान को सामान्य रखने के लिए तुलसी का सेवन एक अच्छा विकल्प है।

फीवर का आयुर्वेदिक इलाज अदरक से (Ayurvedic treatment of fever with ginger)

आयुर्वेद में फीवर होने पर अदरक के सेवन की सलाह दी जाती है। बुखार होने पर अदरक के सेवन से लाभ मिलता है। अदरक में विटामिन-बी 6 और मैग्नेशियम जैसे तत्व मौजूद होते हैं, जो शरीर के लिए काफी लाभकारी होता है।

फीवर का आयुर्वेदिक इलाज मेथी से (ayurvedic treatment of fever with fenugreek)

मेथी में एंटीइंफ्लेमेटरी और एंटीऑक्सिडेंट गुण पाए जाते हैं। बुखार होने पर मेथी के दाने का पानी पिने से काफी लाभ मिलता है। मेथी वजन को भी संतुलित करने का एक अच्छा विकल्प है।

फीवर का आयुर्वेदिक इलाज लहसुन से (ayurvedic treatment of fever with garlic)

बुखार में लहसुन का सेवन काफी फायदेमंद होता है। लहसुन वायरल फीवर, बॉडी पेन एवं संक्रमण से बचाये रखने में मददगार होता है। कच्चे लहसुन का नियमित सेवन हाई कोलेस्ट्रॉल, दिल से संबंधित बीमारी और हाई ब्लड प्रेशर जैसी परेशानियों को दूर करने में मदद करता है।

ऊपर बताये गए उपाय से बुखार का आयुर्वेदिक इलाज किया जाता है। इन औषधियों को किस तरह से और कैसे सेवन करना चाहिए आयुर्वेदिक चिकित्षक के परामर्श के बाद ही करे।

FAQ

बुखार होने पर लोगो के मन में इस प्रकार के सवाल उठ सकते है जैसे:

बुखार की सबसे अच्छी दवा कौन सी है?

वायरल फीवर मैं क्या क्या खाना चाहिए?

हड्डियों का बुखार कैसे दूर करें?

बार बार बुखार आना क्या कारण है?

पुराना से पुराना बुखार का इलाज क्या है?

वायरल फीवर एंटीबायोटिक मेडिसिन नाम क्या है?

बुखार की सबसे अच्छी घरेलू दवा क्या है?

फीवर उतारने के घरेलू उपाय क्या है?

बुखार की सबसे अच्छी आयुर्वेदिक दवा क्या है?

वायरल फीवर ट्रीटमेंट मेडिसिन क्या है ?

अंदरूनी बुखार की दवा क्या है ?

वायरल फीवर के लक्षण क्या है?

दोस्तों यदि आपको इन सवालों का सही उत्तर पता है तो कमेंट बॉक्स में जरूर बताइये। ताकि लोगो को फायदा मिल सके।

धन्यबाद!

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